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कुनकुरी विधायक व संसदीय सचिव यू. डी. मिंज ने कहा जिले में किसी भी प्रकार का प्लांट नहीं लगने दिया जाएगा, टाॅंगरगाॅंव में 4 अगस्त को आयोजित जनसुनवाई निरस्त करने की मांग, संसदीय सचिव ने कहा जिले मे धारा 144 लागू है ऐसे मे जनसुनवाई कहां तक सही है

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जशपुर । जशपुर जिले के खूबसूरती से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। न यहाँ किसी प्रकार का प्रदूषण फैलाने वाला प्लांट लगने दिया जाएगा न ही किसी प्रकार खनन करने दिया जाएगा। जशपुर को हम खूबसूरत बनाने और यहाँ पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहे हैं। ऐसे में कोई जशपुर की जनता के मंशा के विरुद्ध अपनी मनमानी से यहां के आबो हवा को बिगाड़ने के लिए और अपनी निजी स्वार्थ के लिए किसी भी प्रकार का उद्योग नियम विरुद्ध लगायेगा तो हम जशपुर के लोग मिलकर इसका विरोध करेंगे। हमने पहले भी सड़क पर आ कर विरोध किया है अब भी विरोध करेंगे। जो भी लोग स्पंज फैक्टरी को लेकर सौदेबाजी कर रहे हैं वो जशपुर को तबाही की ओर झोंक रहे हैं। यह हरगिज़ बर्दाश्त नहीँ किया जायेगा। उक्त बातें छत्तीसगढ़ शासन के संसदीय सचिव व कुनकुरी विधायक यू.डी. मिंज ने कहा है। उन्होंने कहा कि जल जंगल जमीन हमारा है इसकी रक्षा का दायित्व भी हमारा है। उद्योगपति खुद के लाभ के लिए हमारे भविष्य का नुकसान करें ये हम होने नहीँ देंगे। इसके लिए मुझे किसी भी प्रकार की कीमत चुकानी पड़ेगी तो मै इसके लिए तैयार हूँ। उन्होंने जनता के तरफ से कलेक्टर से अपील की है कि जनसुनवाई को कोविड को देखते हुए और कंपनी के द्वारा प्रस्तावित योजना में भारी अनियमितता होने के कारण निरस्त किया जाय।उन्होंने कहा कि जनसुनवाई जनजातीय आयोग के माध्यम से कराई जाय और इसकी पूरी छानबीन भी कराई जाय।
ज्ञात हो कि जशपुर जिले के कांसाबेल तहसील के टाँगरगाँव में एक उद्योग स्थापित किया जा रहा है जिसका नाम माँ कुदरगढी स्टील प्राइवेट लिमिटेड है जो कि स्पंज आयरन पलांट लगाना चाहते है और जशपुर जिले को बर्बाद करना चाहते हैं उनकी मंशा हम समझते हैं भले ही लोगों को वो इसके बारे में कुछ भी समझा ले बरगला ले लालच देकर खरीद ले लेकिन उनकी मंशा को किसी भी स्थिति में हम सफल होने नहीं देंगे और 4 अगस्त को होने वाले जनसुनवाई का जशपुर के पर्यावरण प्रेमी जशपुर की हरियाली से प्रेम करने वाले ,अपनी जमीन से प्रेम करने वाली जशपुर की जनता के साथ मिलकर पुरजोर विरोध करेंगे।
उन्होंने कहा कि जहाँ जहां भी उद्योग लगा है वहां की स्थिति आज क्या है हर कोई जानता है। ज्यादा दूर के जाने की जरुरत नहीं है करीब के जिले रायगढ़ और आओड़िसा के झारसुगुडा मे आज पर्यावरण की क्या स्थिति है आप देख सकते हैं । वहां के खेतों नदी नालों की स्थिति क्या है सभी जानते हैं किसी से छिपा नहीं है। ऐसे स्थानों पर अपराध तेजी के साथ बढ़ते हैं बाहरी लोगों का आगमन होता है और स्थानीय लोग रोजगार से वंचित होते हैं। उन्होंने कहा कि मैंने देखा है कि ऐसे स्थानों पर अपराध दर क्या है। एक बार उद्योग लग जाता है तो फैक्ट्री मालिक किसी की भी बात नहीं सुनते हैं और अपनी मनमानी करते हैं । स्थानीय लोगों को दरकिनार कर दिया जाता है।
उन्होंने टाँगर गाँव मे लगने वाले माँ कुदरगढी स्पंज आयरन फैक्टरी के संबंध में अपना विरोध दर्ज करते हुए कहा कि सर्वप्रथम टाॅंगरगाॅंव तहसील काॅंसाबेल जिला जशपुर में दिनांक 04/08/ 2021 को आयोजित जनसुनवाई निरस्त की जाय।
संसदीय सचिव यूडी मिंज ने कहा कि कोरोना महामारी अभी खत्म नहीं हुई अभी भी पोसिेटिव मरीज निकल रहे हैं और इस कारण किसी भी प्रकार का बडा आयेाजन सामाजिक आयोजन प्रतिबन्धित है । कलेक्टर जशपुर ने धारा 144 लगाई है । इन परिस्थितियों में जिला प्रशासन इस महामारी में भी जनसुनवाई करवाने की अनुमति प्रदान की है जो कि गलत है। इसलिए टांगरगांव में 4 अगस्त को होने वाली जनसुनवाई को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाये। कोरोना संक्रमण के प्रभाव समाप्त होने के बाद ही जन सुनवाई की कारवाई की जाये। यह निर्धारित होना चाहिये कि टांगरगांव जिला जशपुर में होने वाली जनसुनवाई में कितने लोग शामिल होने वाले हैं प्रशासन द्वारा कितने लोगों को इसकी अनुमति प्रदान की गई है। जिला प्रशासन द्वारा कंपनियों की जनसुनवाई में हजारों लोगों की अनुमति प्रदान करता है वहां आम जनता के अंतिम संस्कार एवं शादी ब्याह में सरकार द्वारा सुनिश्चित किए गए जनसंख्या के ज्यादा होने पर जुर्माना जैसी कार्यवाही करता है ।कोविड नियमों के पालन हेतु क्या उपाय किये जा रहे हैं। यदि इस आयेजन बाद कोविड फैलता है तो इसके लिये जिम्मेदार कौन होगा।
उन्होंने कहा कि टांगरगांव तहसील कांसबेल जिला जशपुर में स्टील प्लांट लगाना चाहते हैं जशपुर जिला संपूर्ण क्षेत्र अधिसूचित क्षेत्र होने के कारण संविधान के 5 वीं अनुसूची लागू होता है और पेशा अधिनियम 1996 के अंतर्गत आता है जिससे स्टील प्लांट यहाँ नहीं लगाया जा सकता है। यह क्षेत्र के आधे से अधिक गांव पांचवी अनुसूची क्षेत्र के अंतर्गत आता है जहां पेसा एक्ट कानून लागू होता है ऐसा एक्ट कानून के मुताबिक बिना ग्राम सभा के अनुमति के बगैर किसी भी प्रकार का उद्योग एवं कोई गतिविधियां संचालित नहीं की जा सकती हैं परंतु प्रशासन द्वारा पांचवी अनुसूची पेसा एक्ट कानून के नियमों का सीधा उल्लंघन किया जाता है और ग्राम सभा के मिले अधिकारों का सीधा सीधा उल्लंघन किया जाता है जो पेसा एक्ट कानून के नियमों का सीधा सीधा उल्लंघन है।
श्री मिंज ने मुखर रूप से कहा कि भूअर्जन अधिनियम 2013 के अनुसार निजी कंपनी के द्वारा उद्योग हेतु कलेक्टर के मंजूरी के बिना भूमि की खरीदी नहीं किया जा सकता है। यदि संबंधित नीजि कंपनी द्वारा उद्योग के नाम से खरीदी गयी भूमि को शासन में राजसात किया जावे।तथा टांगरगाव अधिसूचित क्षेत्र में होने के कारण अधिकांश भूमि स्वामी अनुसूचित जनजाति के है ।इनकी भूमि नीजि कंपनी द्वारा अनुसूचित जनजति के नाम से खरीद किया गया है तो छ.ग. भू.रा.स. 1959 की धारा 170 ख के तहत जाॅंच कर बैनामी खरीद बिक्री अवैध घोषित कर मूल आदिवासी को भूमि वापस किया जाये।
उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त भी कई पहलू जिन पर बिना विचार किये और जिले के जनप्रतिनिधियों से बिना बात किये उद्योग को लगाने का दबाव क्यों है इतनी व्याकुलता आखिर क्यो है सबसे चर्चा की जाए फिर इस दिशा में कोई काम किया जाय।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि जशपुर जिला ग्रीन बेल्ट में आता है और उद्योग लगने से यहाॅं का पर्यावरण प्रभावित होगा जिसके कारण प्रदुषण बढेगा इस कारण यहाॅं उद्योग न लगाया जाये बल्कि इसके स्थान पर यहाॅं पर्यटन को बढाया जाये । जशपुर जिले कीे जलवायु एग्रो टूरिज्म के लिये अनुकूल है इसलिये एग्रो टूरिज्म को बढावा दिया जाना चाहिये न की किसी अन्य स्टील इंडस्ट्रीज या खनन उद्योग को स्थापित किया जाये।
उन्होंने बताया कि माॅ कुदरगढी एनर्जी एंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड के द्वारा कोयला आयरन ओर एवं डोलोमाइट का चूरा करकर का उपयोग के लिये उडीसा स्थित खदानों से लाया जायेगा जिसकी दूरी 250 किमी कोयला के लिये धरमजयगढ और विश्राम पुर से लायेगा जिसकी दूरी 130 किमी है। जो कि इंजीनीयिरंग इकोनॉमिक्स के हिसाब से भी गलत है। शासन को गलत जानकारी देकर सब्सिडी पाने के लिये यह उद्योग स्थापित करने के लिये किया जा रहा है।
साथ ही माॅ कुदरगढी एनर्जी एंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड के द्वारा बिना अनुमति के मशीन लगाकर कार्य कराया जा रहा है जिसे जब्त किया जाये। जब तक कार्य आरंभ होने की अनुमति नहीं मिल जाती तब तक किसी भी प्रकार का कार्य न हो यदि किसी प्रकार का कार्य कंपनी के द्वारा किया जाता है तो उसके विरूद्ध कार्यवाही की जाये।यह माँग उन्होंने की है।
उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है की जशपुर जिले का जल स्तर अत्यंत निम्न है सेंट्रल वाटर कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर जशपुर ज़िला डेंजर जोन में है । जिसके कारण यदि फैक्टरी द्वारा स्पंज आयरन प्लांट के लिये किया जायेगा तो इस क्षेत्र के लिये भारी जल समस्या का करण भी बनेगा। माॅ कुदरगढी एनर्जी एंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड के द्वारा मैनी नदी से 2.99 मि.ध.ली प्रतिवर्ष उपयोग किया जायेगा। मैनी एक पहाड़ी नदी है इसके माध्यम से कंपनी की जल आपूर्ति सम्भव ही नहीं है साथ इससे जल समस्या बढेगा । मैनी नदी प्रदूषित भी होगी। इसके लिये कपंनी के द्वारा राज्य शासन जलसंसाधन विभाग के अनुमति भी प्राप्त नहीं की गई है। इन परिस्थितियों को देखते हुए माॅ कुदरगढी एनर्जी एंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड को इस जनसुनवाई की अनुमति प्रदान नहीं की जानी चाहिए अगर जिला प्रशासन इनके जनसुनवाई के अनुमति प्रदान करता है हम इस कंपनी की जन सुनवाई की प्रक्रिया का विरोध करते हैं
संसदीय सचिव यूडी मिंज ने बताया कि कांसाबेल तहसील के ग्राम टांगरगांव प्रांगण में की जा रही है इस जनसुनवाई में टीका टिप्पणी सुझाव दे पाने में ग्रामीण असमर्थ हैं इस परियोजना में प्रभावित क्षेत्र के अंतर्गत गांव में ईआईए नोटिफिकेशन हिंदी और अंग्रेजी उपलब्ध नहीं कराया गया है जोकि इसमें आधे से ज्यादा प्रभावित गांव पांचवी अनुसूची क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं जहां पेसा एक्ट कानून लागू होता है कंपनी एवं पर्यावरण संरक्षण मंडल रायगढ़ द्वारा नियमों का विधि सम्मत पालन नहीं किया गया है इसलिए इस जनसुनवाई को तत्काल निरस्त किया जाए।
उन्होंने कहा कि यह हाथी कारीडोर में आता है और क्षेत्र हाथी प्रभावित क्षेत्र है जहां हाथियों द्वारा आसपास के ग्रामीणों के खेतों का कृषि नुकसान एवं कभी-कभी वनों में या जंगलों में मानव क्षति भी पहुंचाई जाती है जिसकी क्षतिपूर्ति के रूप में जशपुर वन विभाग द्वारा कृषि क्षतिपूर्ति एवं मानव क्षतिपूर्ति के रूप में साथ ही हाथियों के भोजन एवं रखरखाव के लिए खर्च किए जाते हैं ।
उन्होंने कहा कि जिले में निवासरत लोग कृषि पशुधन एवं वनों उपज का संग्रह कर जीवन यापन करते हैं औद्योगीकरण की वजह से जंगलों में मिलने वाला तेंदूपत्ता महुआ डोरी चिरौंजी हर्रा बहेड़ा आमला पराया विलुप्त हो रहा है जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में खासतौर से आदिवासी समुदाय के लोगों का जीवन यापन खतरे में पड़ गया है। इस्पात उद्योग लगने से यह और विलुप्त हो जायेगा। स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों का आय उपार्जन बन्द होने उनकी आजीविका पर असर पडेगा। इसलिए स्पंज आयरन प्लांट टांगरगाव के अलावा संपूर्ण जिले में कहीं भी न लगाया जाये।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र में पावर प्लांट के कारण ट्रकों से व्यापक पैमाने पर चलने पर दुर्घटनाएं होगी ,सड़कों में व्यापक पैमाने पर दबाव बढ़ेगा जिससे दुर्घटनाओं में व्यापक पैमाने पर बढ़ोतरी होगी । जिले के विकासखंड के अंदर औद्योगिकरण की वजह से आम जनमानस में स्वास्थ्य को लेकर किस तरह के प्रभाव पड़ेगे ,जो कि इस क्षेत्र में सिलिकोसिस टीबी दमा स्नोफीलिया कैंसर खाज खुजली इस्नोफीलिया दमा टीवी कैंसर शरीर में चर्म रोग
जैसे गंभीर बीमारियां की वजह होगी ।
आज आप जाकर रायगढ जिले की ओर स्थिति देख लीजिये।इसका अध्ययन केंद्रीय पॉल्यूशन बोर्ड नई दिल्ली द्वारा किया गया है और सरकार को यह सुझाव दिया गया है कि यहां उद्योग बंद कर दिए जाएं । इसी प्रकार की स्थिति जशपुर जिले के कुनकुरी कांसाबेल फरसाबाहर क्षेत्र में होने वाली हैं। अतः इसपर अध्ययन करने के उपरान्त ही कंपनी को उद्योग लगाने की अनुमति मिलनी चाहिये।
उन्होंने कहा कि जिले मे औद्योगीकरण होने के कारण जशपुर जिले में अपराधों में व्यापक पैमाने पर बढ़ोतरी होगी इसका मूल के बजाय दूसरे राज्यों से काम करने आने वाले जो लोग आसपास के गांवों में किराए के मकान में रहकर कार्य करते हैं जिनके द्वारा गंभीर घटनाओं में अपराध में हिस्सेदारी बढेगी। जिससे इस क्षेत्र में व्यापक पैमाने पर अपराधों में बढ़ोतरी होगी इन गतिविधियों का संचालन करने के पूर्व किसी भी प्रकार का कोई अध्ययन नहीं किया गया है।
सभी उद्योग कहते जरूर है कि स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार का अवसर देंगे पर देखा यही गया है कि स्थानीय बेरोजगारों को अवसर नहीं मिलता है और बाहर लोंगो को स्थापित कर रोजगार दिया जाता है। स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के बजाय अन्य राज्य के युवाओं को रोजगार दिया गया है। इस पर कंपनी और सरकार को विचार करना चाहिए कि स्थानीय उद्योगों में स्थानीय बेरोजगारों को कैसे रोजगार उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
छत्तीसगढ़ शासन के संसदीय सचिव ने कहा कि मैं जिले के पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले उद्योग के विरोध में हूँ जिले को पर्यटन उद्योग के रूप में एग्रो टूरिज़म के रूपहोने वाली में स्थापित किये जाने के समर्थन में हूँ। इसलिए माँग करता हुँ की कांसाबेल के टाँगर गाँव मे दिनाॅंक 04 .08 .2021 को होने वाली जन सुनवाई का कार्य स्थगित किया जाये तथा प्लांट किसी भी दशा में स्थापित नहीं किया जाये।

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