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मौन भूख हड़ताल पर बैठने गई आदिवासी युवती को तपकरा पुलिस ने 6 घंटे थाना के भीतर आरोपिया की तरह बैठाया, धारा 151 के तहत जेल भेजने की दी जा रही थी धमकी, युवती का मुलाहिजा भी कराया, मोबाईल फोन भी किया जब्त , पढ़िये पूरी खबर

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जशपुर । मौन भूख हड़ताल पर बैठने गई आदिवासी युवती को तपकरा पुलिस ने लगातार 6 घंटे थाना के भीतर किसी मामले की आरोपिया की तरह बैठा दिया । थाना के भीतर आदिवासी युवती को तपकरा पुलिस धारा 151 के तहत जेल भेजने की धमकी दे रहे थे। तपकरा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भेजकर युवती का मुलाहिजा भी करा दिया गया । इससे भी जब तपकरा पुलिस का मन नहीं भरा तो उसने आदिवासी युवती का मोबाईल फोन छीनकर कुछ समय के लिये जब्त कर लिया था।

आदिवासी युवती स्वाति लकड़ा ने बताया कि 4 अगस्त 2023 को उसकी मां सलमी लकड़ा की शासकीय मेडिकल कालेज अंबिकापुर मे ईलाज के दौरान मौत हो गई। आदिवासी युवती का आरोप है कि उसकी मां के मौत का जिम्मेदार सुण्डरू ग्राम पंचायत का उपसरपंच रविनारायण यादव है। उसने बताया कि 8 अगस्त 2023 को जशपुर एसपी डी. रविशंकर तपकरा थाना आये थे इस दौरान वह तपकरा थाना पहुंचकर रविनारायण यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने एसपी को लिखित आवेदन दी है। 6 दिन बीत जाने के बाद भी उसके आवेदन पर कोई विचार नही किया गया तब जाकर आदिवासी युवती ने 14 अगस्त 2023 को फरसाबहार एसडीएम को भूख हड़ताल पर बैठने की लिखित सूचना देते हुए एसडीएम फरसाबहार को मोबाइल पर काल करके भी भूखहड़ताल पर बैठने की सूचना दी। यही नहीं आदिवासी युवती ने कलेक्टर, एसपी और तपकरा थाना प्रभारी को भी भूखहड़ताल पर बैठने की सूचना whatsapp पर आवेदन भेजकर कर दी थी। युवती ने बताया की वह भूखहड़ताल पर बैठने संबंधी आवेदन की कापी डीजीपी के ईमेल आईडी मे भी सेंड की है।

आदिवासी युवती स्वाति ने बताया कि वह मंगलवार 15 अगस्त को प्रात: 8:45 बजे मौन भूखहड़ताल पर बैठने के लिये तपकरा थाना परिसर पहुंची। थाना पहुंचने के बाद वह तपकरा थाना परिसर में बने चबूतरे के बगल मे जमीन मे बैठ गई। कुछ देर बाद उसे जबरन वहां से उठाकर थाना के भीतर बैठा दिया गया। उसने बताया कि तपकरा थाना प्रभारी पुलिस स्टाफ से बोल रहे थे कि इस लड़की को आज जेल भेजेंगे।उसने बताया कि दोपहर में उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तपकरा ले जाया गया जहां उसका मेडिकल कराया गया कोरोना जांच भी कराया गया। उसने बताया कि उसे अपरान्ह लगभग 03:07 मिनट पर तपकरा थाना से छोड़ा गया। आदिवासी युवती ने बताया कि उसे तपकरा थाना के भीतर लगातार 6 घंटे बैठा दिया गया जबकि उसका कोई कसूर नहीं था वह तो अपनी मरी हुई मां को न्याय दिलाने के उद्देश्य से शांति से मौन भूखहड़ताल पर बैठने के लिये तपकरा थाना पहुंची थी। उसने बताया इस घटना के बाद से वह काफी सहमी हुई है और मानसिक तनाव से गुजर रही है। उसने बताया कि उसकी मां की मौत मानसिक तनाव और डर से हुई है। वह भी तपकरा पुलिस से डरी हुई है। उसने बताया कि तपकरा पुलिस उसे किसी भी मामले में फंसाकर जेल भेज देंगे।

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