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जशपुर की अमराई में आई बौरों की बहार, 5 हजार 410 हेक्टेयर में लहलहाई आम की फसल , रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद से उत्साहित किसान

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जशपुर 23 फरवरी 2026। जशपुर जिले की अमराइयों में इन दिनों बौरों की खुशबू महक रही है। पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इस वर्ष आम के पेड़ों पर मंजरियाँ अधिक सघन, स्वस्थ और भरपूर दिखाई दे रही हैं। दशहरी, लंगड़ा, चौसा और आम्रपाली जैसी प्रमुख प्रजातियों के वृक्ष सफेद-पीले फूलों से पूरी तरह आच्छादित हो चुके हैं, जिससे किसानों में रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद जगी है। जिले में वर्तमान में लगभग 5 हजार 410 हेक्टेयर क्षेत्र में आम की खेती की जा रही है। इस वर्ष अनुकूल मौसम और बेहतर मंजरियों के कारण उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना व्यक्त की जा रही है। सहायक संचालक उद्यान श्री करण सोनकर ने बताया कि यदि किसान तकनीकी प्रबंधन के उपायों को समय पर अपनाएं, तो आम की उपज में 20 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है, जिससे किसानों की आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। जशपुर का आम अपनी मिठास और गुणवत्ता के कारण प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी भेजा जाता है। श्री सोनकर ने किसानों से अपील की है कि वे अपने बागानों का नियमित निरीक्षण करें और आवश्यकता पड़ने पर उद्यान विभाग से तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त करें, ताकि फसल को रोग एवं कीटों से सुरक्षित रखा जा सके।

किसानों के लिए आवश्यक सलाह –
उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों को आम की बेहतर पैदावार हेतु महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं। बौर आने की अवस्था में सिंचाई रोक देना चाहिए और तब तक पानी नहीं देना चाहिए, जब तक बौर पूरी तरह न खिल जाएं। अधिक सिंचाई से नई पत्तियां निकलने लगती हैं, जिससे बौर झड़ने की आशंका बढ़ जाती है। जब फल मटर के दाने के बराबर हो जाएं, तब हल्की सिंचाई प्रारंभ कर मिट्टी में नमी बनाए रखना उचित है। फूल खिलने की अवस्था में कीटनाशकों का छिड़काव नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे परागण करने वाली मधुमक्खियों को नुकसान पहुंचता है। यदि मैंगो हॉपर का प्रकोप अधिक हो, तो शाम के समय इमिडाक्लोप्रिड का छिड़काव किया जा सकता है।

यदि बौर पर सफेद पाउडर जैसा लक्षण दिखाई दे, तो यह पाउड्री मिल्डियू का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में घुलनशील गंधक का छिड़काव लाभकारी रहेगा। बौर पर काले धब्बे दिखने पर एंथ्राकनोज रोग की आशंका रहती है, जिसके नियंत्रण हेतु कार्बेन्डाजिम या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव करना चाहिए।

बौर आने के समय नाइट्रोजन युक्त उर्वरक जैसे यूरिया का उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे फूल झड़ सकते हैं। फूलों के झड़ने को रोकने और फल सेटिंग सुधारने के लिए बोरान एवं पोटैशियम नाइट्रेट का छिड़काव लाभदायक है। जब फल मटर के दाने के बराबर हो जाएं, तब प्लानोफिक्स का छिड़काव करने से फलों का गिरना कम किया जा सकता है। उद्यानिकी विभाग का मानना है कि यदि किसान समय पर वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाएं, तो इस वर्ष जशपुर जिले में आम उत्पादन नए कीर्तिमान स्थापित कर सकता है। अमराई की यह बहार न केवल खेतों को महका रही है, बल्कि किसानों की उम्मीदों को भी नई उड़ान दे रही है।

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