रायपुर । नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा की नई अलख, सरकार और सुरक्षाबलों की पहल से जगी है, दुर्गम इलाकों में मॉडल स्कूल, ‘नियद नेल्ला नार’ जैसी योजनाओं और समर्पित शिक्षकों के माध्यम से बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है, जो अब फर्राटेदार अंग्रेजी बोलकर और तकनीकी कौशल सीखकर अपना भविष्य संवार रहे हैं। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुदूर क्षेत्रों में अब शिक्षा का उजाला फिर से फैलने लगा है। शासन के सतत प्रयासों और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में चल रही योजनाओं के कारण सुकमा जिले में बंद पड़े स्कूलों को पुनः संचालित किया गया है, जिससे शिक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिली है। अब इन क्षेत्रों में बंदूक की गूंज की जगह स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई, ककहरा और किताबों की सरसराहट सुनाई दे रही है, जो एक उज्ज्वल और सुरक्षित भविष्य का संकेत है।
वर्ष 2006 में माओवादी प्रभाव और सलवा जुडूम आंदोलन के चलते सुकमा जिले के कुल 123 स्कूल बंद हो गए थे, जिनमें 101 प्राथमिक और 21 माध्यमिक विद्यालय शामिल थे। प्रशासन के लगातार प्रयासों से अब इन सभी स्कूलों को पुनः प्रारंभ कर दिया गया है। वर्तमान में जिले में एक भी ऐसा विद्यालय नहीं है जो नक्सल प्रभाव के कारण बंद हो। नक्सल आतंक से कभी छूटा था स्कूल, अब सुशासन से फिर जागी शिक्षा की अलख,उम्मीदों को मिल रहा सहारा। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भय के कारण बंद हुए स्कूल फिर से खुल रहे हैं। स्कूल छोड़ चुके बच्चों की स्कूल में वापसी हो रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में शिक्षा का उजियारा बस्तर क्षेत्र की हर दिशा में फैल रहा है।
शिक्षा के विस्तार और छात्रों के बेहतर भविष्य को ध्यान में रखते हुए जिले में बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ किया गया है। वर्तमान में 16 पोटा केबिन (आवासीय विद्यालय) संचालित हैं, जिनमें 6,722 छात्र अध्ययनरत हैं। इसके साथ ही 16 पोटा केबिन छात्रावासों में 1,389 विद्यार्थी रहकर अपनी पढ़ाई कर रहे हैं। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय टाइप-3 (कक्षा 6वीं से 12वीं) के 3 विद्यालयों में 600 छात्राएं तथा टाइप-4 (कक्षा 9वीं से 12वीं) के 2 छात्रावासों में 200 छात्राएं लाभान्वित हो रही हैं।
“नियद नेल्ला नार योजना” से नई शुरुआत :
वर्ष 2024-25 में “नियद नेल्ला नार योजना” के अंतर्गत सुकमा जिले के चयनित गांवों में 07 नए प्राथमिक विद्यालय खोले गए हैं, जिनमें अब तक 210 बच्चों ने प्रवेश लिया है। भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए प्रशासन द्वारा 19 और नए विद्यालय खोलने का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिससे शिक्षा का दायरा और अधिक विस्तृत होगा।
बदलाव की नई कहानी
जमीनी स्तर पर हो रहे ये सकारात्मक बदलाव न केवल बच्चों के भविष्य को संवार रहे हैं, बल्कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विश्वास और विकास की नई नींव भी रख रहे हैं। शासन द्वारा “पहले” और “अब” की तस्वीरों के माध्यम से इस परिवर्तन को प्रमाणित किया गया है।



