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समय-सीमा बैठक में कलेक्टर की सख्ती, डीएमएफ के नियमों का कड़ाई से पालन अनिवार्य, 5 वर्षीय समग्र विकास योजना बनाने के निर्देश

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मनेन्द्रगढ़-चिरमीरी-भरतपुर (एमसीबी)। कलेक्ट्रेट कार्यालय के सभाकक्ष में कलेक्टर डी. राहुल वेंकट की अध्यक्षता में आयोजित समय-सीमा समीक्षा बैठक में विभिन्न विभागों की योजनाओं की गहन समीक्षा की गई। बैठक में खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और वित्तीय अनुशासन पर विशेष जोर दिया गया।

कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि केंद्र सरकार द्वारा लागू प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (PMKKKY-2024) के संशोधित दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 9B(3) के तहत अधिसूचित इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना है। बैठक में कलेक्टर ने जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) अंतर्गत संचालित एवं प्रस्तावित कार्यों की समीक्षा करते हुए निर्देशित किया कि केवल उन्हीं परियोजनाओं को स्वीकृति दी जाए, जो सीधे तौर पर खनन प्रभावित क्षेत्रों और वहां के निवासियों को लाभ पहुंचाती हों। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत लाभ या योजना की मूल भावना के विपरीत कार्यों को किसी भी स्थिति में स्वीकृति नहीं दी जाएगी।

कलेक्टर ने सख्ती दिखाते हुए कहा कि व्यायामशाला नवीनीकरण, मुर्गों की लड़ाई के लिए चबूतरा निर्माण, पंचायत उपयोग हेतु मोबाइल/वाहन क्रय जैसे कार्य पूर्णतः प्रतिबंधित हैं और ऐसे प्रस्तावों को तत्काल निरस्त किया जाए। साथ ही मूर्तियां, स्मारक, हेलीपैड, शॉपिंग मॉल, मल्टीप्लेक्स, निजी औद्योगिक पार्क, राजनीतिक कार्यक्रम, अधिकारियों के लिए वाहन एवं मोबाइल खरीद जैसी गतिविधियों को भी योजना से बाहर रखने के निर्देश दिए गए।

बैठक के दौरान सभी विभागों को 5 वर्षीय Perspective Plan (दीर्घकालिक योजना) तैयार करने के निर्देश दिए गए, जिसे 15 मई 2026 तक ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। इस योजना में आगामी पांच वर्षों के लिए जिले के समग्र विकास का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया जाएगा। 50 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं के लिए अलग विस्तृत योजना तथा 25-30 करोड़ रुपये के कार्यों को प्राथमिकता में शामिल करने के निर्देश दिए गए।

कलेक्टर ने सभी विभागों को खनन प्रभावित गांवों की सूची के आधार पर योजनाओं का चयन करने तथा पंचायत, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, विद्युत, क्रेडा और उद्यानिकी विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर कार्य करने के निर्देश दिए।

महिला एवं बाल विकास विभाग को आंगनबाड़ी केंद्रों का सर्वे कर उनकी स्थिति का आकलन करने तथा प्रति वर्ष कम से कम 30 केंद्रों के निर्माण या उन्नयन का लक्ष्य निर्धारित करने को कहा गया। स्वास्थ्य विभाग को डॉक्टरों की उपलब्धता एवं प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए, जबकि पंचायत विभाग को जल संरक्षण हेतु चेक डैम निर्माण की योजना तैयार करने को कहा गया।

कलेक्टर ने कहा कि प्रत्येक अधोसंरचना परियोजना में बिजली सुविधा अनिवार्य रूप से शामिल की जाए, ताकि सभी परिसंपत्तियां पूर्ण रूप से उपयोगी बन सकें। साथ ही सभी विभागों को अपने कार्यों की जानकारी नियमित रूप से ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट करने के निर्देश दिए गए, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। राजस्व विभाग की समीक्षा करते हुए लंबित प्रकरणों के त्वरित निराकरण, सीमांकन, बंटवारा एवं नामांतरण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। बैठक में विभिन्न विभागों के रिक्त पदों, वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक व्यय की भी समीक्षा की गई।

कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक व्यय को न्यूनतम रखते हुए अधिक से अधिक राशि जनहितकारी कार्यों पर खर्च की जाए तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों की अनदेखी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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