जशपुर। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना छत्तीसगढ़ सहित देशभर के किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार बनकर उभरी है। यह योजना न केवल किसानों को नियमित वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है, बल्कि उन्हें आधुनिक और वैज्ञानिक खेती की दिशा में भी प्रेरित कर रही है। जशपुर जिले में इस योजना का व्यापक प्रभाव देखने को मिल रहा है, जहां 71,733 किसान इससे प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हो रहे हैं। मार्च 2026 में इस योजना की 22वीं किश्त जारी की गई, जिसके अंतर्गत छत्तीसगढ़ के 24 लाख 71 हजार किसानों के खातों में 498.83 करोड़ रुपये की राशि सीधे अंतरित की गई। यह राशि किसानों के लिए समय पर उपलब्ध वित्तीय सहयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत पात्र किसान परिवारों को प्रतिवर्ष 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता तीन समान किश्तों में सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जाती है। यह सहायता किसानों को खाद-बीज की खरीद, मजदूरी भुगतान एवं अन्य कृषि कार्यों में समय पर निवेश करने में सहायक सिद्ध हो रही है, जिससे खेती की निरंतरता और उत्पादकता बनी रहती है।
जशपुर जिले के कई किसान इस योजना से लाभान्वित होकर अपनी खेती को अधिक सुदृढ़ बना रहे हैं । साल्हेकेराडीह के किसान श्री नंदराम ने बताया कि वे पिछले कई वर्षों से इस योजना के लाभार्थी हैं और प्रत्येक किश्त से उन्हें कृषि कार्यों के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने में मदद मिलती है। इससे खेती का कार्य बिना बाधा के चलता है और आय में भी स्थिरता बनी रहती है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इस योजना को किसानों के लिए वरदान बताया।
यह योजना किसानों को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं देती, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी प्रेरित करती है। किसान अब परंपरागत खेती के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाकर उत्पादन बढ़ा रहे हैं और अपनी आय में भी वृद्धि कर रहे हैं। इससे न केवल किसानों का जीवन स्तर बेहतर हो रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।जशपुर जिले में बड़ी संख्या में किसानों तक योजना का लाभ पहुंचना इस बात का प्रमाण है कि शासन की योजनाएं जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से क्रियान्वित हो रही हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना निश्चित रूप से किसानों के सम्मान, आत्मनिर्भरता और कृषि विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बनकर उभरी है।



