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किसानों की आय बढ़ाने एफपीओ होंगे और मजबूत, मूल्य संवर्धन व डिजिटल बाजार से जुड़ेंगे उत्पाद, डीएमसी बैठक में कलेक्टर ने दिए महत्वपूर्ण निर्देश

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जशपुर। किसानों की आय में वृद्धि, कृषि उत्पादों के बेहतर विपणन तथा किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को आत्मनिर्भर और व्यवसायिक रूप से सक्षम बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर श्री रोहित व्यास की अध्यक्षता में जिला स्तरीय अनुश्रवण समिति (डीएमसी) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में भारत सरकार की 10,000 नवीन किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) योजना के अंतर्गत जिले में संचालित एफपीओ की प्रगति, व्यवसायिक गतिविधियों, वित्तीय स्थिति एवं संस्थागत सुदृढ़ीकरण की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार, उप संचालक कृषि, संबंधित विभागीय अधिकारी, सीबीबीओ प्रतिनिधि एवं एफपीओ से जुड़े पदाधिकारी उपस्थित रहे। नवीन सीबीबीओ संस्था अरुणोदय द्वारा एफपीओ की वर्तमान स्थिति एवं प्रारंभिक सर्वेक्षण की जानकारी प्रस्तुत की गई। कलेक्टर ने सभी एफपीओ का विस्तृत बेसलाइन सर्वेक्षण पूर्ण कर व्यवसाय विकास की ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

समीक्षा के दौरान कुछ एफपीओ में निदेशक मंडल (बीओडी) के निष्क्रिय पाए जाने पर कलेक्टर ने नाराजगी व्यक्त करते हुए नियमानुसार विशेष सामान्य सभा आयोजित कर बीओडी के पुनर्गठन की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। इस कार्य की जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ कृषि एवं वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारियों को सौंपी गई। बैठक में जिले के एफपीओ को उच्च मूल्य वाली फसलों और मूल्य संवर्धन आधारित गतिविधियों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। मनोरा एफपीओ में मधुमक्खी पालन, मिर्च एवं टमाटर उत्पादन को बढ़ावा देने तथा दुलदुला एफपीओ में कटहल चिप्स निर्माण, काजू प्रसंस्करण एवं काजू छिलका तेल (सीएनएसएल) उत्पादन जैसे नवाचार आधारित व्यवसाय विकसित करने का निर्णय लिया गया। दुलदुला एफपीओ में काजू छिलका तेल निष्कर्षण मशीन स्थापित करने हेतु कृषि अवसंरचना निधि (एआईएफ) के अंतर्गत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश भी दिए गए।

कलेक्टर श्री व्यास ने जिले के सभी एफपीओ का ओएनडीसी प्लेटफॉर्म पर पंजीयन कराने के निर्देश दिए, ताकि किसानों के उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर का डिजिटल बाजार उपलब्ध कराया जा सके। साथ ही राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के स्व-सहायता समूहों एवं उत्पादक समूहों की महिलाओं को एफपीओ से जोड़कर उनके उत्पादों के ऑनलाइन विपणन को बढ़ावा देने पर बल दिया गया। बैठक में कुनकुरी एफपीओ के माध्यम से कृषि यंत्रीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए एसएमएएम योजना के अंतर्गत कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने हेतु डीपीआर तैयार करने का निर्णय लिया गया। वहीं मनोरा क्षेत्र के नाशपाती उत्पादक किसानों को एफपीओ के माध्यम से कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से जोड़ने की कार्ययोजना तैयार करने पर भी सहमति बनी।
एफपीओ को मिलने वाली प्रबंधन लागत सहायता (मैनेजमेंट कॉस्ट) की समीक्षा के दौरान समिति ने पाया कि पूर्व में कार्यरत सीबीबीओ द्वारा आवश्यक कार्यवाही समय पर नहीं किए जाने के कारण कुछ एफपीओ को केवल पहली किस्त ही प्राप्त हो सकी है। इस संबंध में नाफेड को पत्र प्रेषित कर विशेष परिस्थितियों में शेष सहायता राशि उपलब्ध कराने का अनुरोध करने का निर्णय लिया गया।

कलेक्टर ने सभी एफपीओ के बैंक खातों, वित्तीय अभिलेखों, अंशपूंजी, टर्नओवर एवं व्यवसायिक गतिविधियों का परीक्षण कर उनकी वित्तीय प्रगति का मूल्यांकन करने के निर्देश दिए। साथ ही सदस्य संख्या बढ़ाकर पात्र एफपीओ को अधिकतम इक्विटी ग्रांट का लाभ दिलाने के लिए विशेष सदस्यता अभियान चलाने पर जोर दिया। बैठक में निर्णय लिया गया कि 15 से 18 जून 2026 तक विकासखंड स्तर पर विशेष बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिनमें एफपीओ की समस्याओं, सदस्यता विस्तार, बीओडी पुनर्गठन एवं व्यवसायिक गतिविधियों की समीक्षा की जाएगी। इन बैठकों में कृषि विभाग, सीबीबीओ एवं एनआरएलएम के अधिकारी संयुक्त रूप से सहभागिता करेंगे।

कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने कहा कि किसान उत्पादक संगठन किसानों की आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम हैं। एफपीओ के माध्यम से किसानों को बेहतर बाजार, मूल्य संवर्धन, आधुनिक तकनीक और व्यवसायिक अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी एफपीओ को सक्रिय, आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए समन्वित प्रयास किए जाएं, ताकि जिले के किसान संगठित होकर अधिक लाभ अर्जित कर सकें।

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