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राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा की अध्यक्षता में जिला स्तरीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक हुईं आयोजित, जनजातीय अधिकारों की सुरक्षा और विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर

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जशपुर। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा की अध्यक्षता में आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिला स्तरीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में कलेक्टर श्री रोहित व्यास, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री राकेश पाटनवार सहित विभिन्न विभागों के जिला अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में जनजातीय समुदाय के कल्याण एवं विकास के लिए संचालित योजनाओं, विकासकार्यों तथा शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं के क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान डॉ. आशा लकड़ा ने विभागवार प्रगति का आकलन करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनजातीय समुदाय के सर्वांगीण विकास के लिए संचालित सभी योजनाओं का प्रभावी, पारदर्शी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में कार्यों की प्रगति अपेक्षित नहीं है, वहां विशेष प्रयास कर गति लाएं। उन्होंने अधिकारियों से संवेदनशीलता, तत्परता एवं प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए, तभी जनजातीय समुदाय के जीवन स्तर में वास्तविक सुधार संभव होगा।

आयोग को प्राप्त हैं दीवानी न्यायालय के समान अधिकार –
बैठक की शुरुआत में डॉ. आशा लकड़ा ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की संवैधानिक भूमिका, अधिकारों एवं कार्यप्रणाली की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संविधान के प्रावधानों के तहत किसी भी मामले की जांच के दौरान आयोग को दीवानी न्यायालय के समान अधिकार प्राप्त हैं। आयोग किसी भी व्यक्ति अथवा अधिकारी को समन जारी कर उपस्थित होने के निर्देश दे सकता है, सार्वजनिक अभिलेख तलब कर सकता है तथा आवश्यकतानुसार संबंधित अधिकारियों को आयोग के समक्ष उपस्थित होने के लिए निर्देशित कर सकता है।उन्होंने बताया कि आयोग की अनुशंसाएं संबंधित विभागों की कार्रवाई रिपोर्ट के साथ संसद के दोनों सदनों में प्रस्तुत की जाती हैं। इसलिए जनसुनवाई के दौरान प्राप्त प्रत्येक शिकायत एवं सुझाव का विधिवत दस्तावेजीकरण कर उस पर गंभीरता से कार्रवाई की जाती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी गांव में सड़क, बिजली, पेयजल, विद्यालय, शिक्षक, आंगनबाड़ी जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव हो अथवा अनुसूचित जनजाति के किसी व्यक्ति के साथ अन्याय, शोषण, जातिसूचक टिप्पणी या अत्याचार से संबंधित मामला सामने आता है, तो आयोग उसकी सुनवाई कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करता है। उन्होंने कहा कि जनजातीय अधिकारों की रक्षा और विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आयोग पूरी गंभीरता एवं प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।

शिक्षा में नवाचारों की सराहना, बालिका छात्रावासों में सीसीटीवी लगाने के निर्देश-
शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान उन्होंने विद्यालयों में विद्यार्थियों के कौशल विकास एवं व्यक्तित्व निर्माण के लिए खेलकूद, वाद-विवाद, सांस्कृतिक एवं अन्य प्रतियोगिताओं के नियमित आयोजन पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को विद्यालयों का नियमित निरीक्षण कर शैक्षणिक एवं व्यवस्थागत सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही सभी बालिका छात्रावासों में अनिवार्य रूप से सीसीटीवी कैमरे स्थापित करने के निर्देश भी दिए। इस अवसर पर कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने जिले में शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों की जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में जिले में 400 से अधिक स्मार्ट क्लास संचालित हैं। विज्ञान के प्रति विद्यार्थियों में रुचि विकसित करने के उद्देश्य से ‘अन्वेषण’ कार्यक्रम के तहत विद्यालयों में थ्री-डी प्लेनेटोरियम शो आयोजित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि घोलेंग में अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला द्वारा ग्राउंड स्टेशन का शुभारंभ किया गया था और मनोरा में विद्यार्थियों द्वारा 10 हजार फीट तक जाने वाले एमेच्योर रॉकेट का सफल प्रक्षेपण भी किया जा चुका है।

धरती आबा जनजातीय उत्कर्ष ग्राम अभियान और जनमन योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर –
कृषि विभाग की समीक्षा के दौरान डॉ. लकड़ा ने किसानों को समय पर एवं मौसम के अनुरूप गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि उत्पादकता प्रभावित ना हो। उन्होंने मत्स्य पालन एवं पशुपालन विभाग को भी अधिक से अधिक जनजातीय परिवारों को विभागीय योजनाओं से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने को कहा। आदिम जाति कल्याण विभाग की समीक्षा के दौरान उन्होंने विशेष रूप से धरती आबा जनजातीय उत्कर्ष ग्राम अभियान तथा जनमन योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ये योजनाएं जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास के उद्देश्य से संचालित की जा रही हैं और इनके माध्यम से जनजातीय अंचलों की तस्वीर बदली जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने को कहा। डॉ. लकड़ा ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित आजीविकामूलक गतिविधियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को अधिक से अधिक जनजातीय युवाओं एवं महिलाओं को प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार और आजीविका से जोड़ने के निर्देश दिए, ताकि उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके।

जनजातीय समुदाय से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता से करें कार्रवाई –
पुलिस विभाग की समीक्षा के दौरान उन्होंने जनजातीय समुदाय के विरुद्ध होने वाले अपराधों में संवेदनशीलता, तत्परता एवं निष्पक्षता के साथ कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में जागरूकता का स्तर अपेक्षाकृत कम होने के कारण पुलिस प्रशासन को कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ जनजागरूकता बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि जनजातीय समुदाय अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो और उन्हें समय पर न्याय मिल सके।

दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत करने के निर्देश-
स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान डॉ. लकड़ा ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश दिए कि दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित हैं, वहां नियमित स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएं, ताकि ग्रामीणों को समय पर उपचार एवं आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें। बैठक में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के कंसल्टेंट श्री एच.आर. मीणा एवं श्री जे.पी. सिंह, सीनियर इन्वेस्टिगेटर सोनल राज, आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त श्री संजय सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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