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दिव्यांग 13 साल की नाबालिग बालिका के साथ दुष्कर्म करने वाले 62 साल के गजाधर पैंकरा को 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा, आरोपी के विरूद्ध जशपुर जिले के थाना फरसाबहार में बी.एन.एस. की धारा 64(2)(ट) एवं पाॅक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत किया गया था अपराध पंजीबद्ध

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जशपुर। दिव्यांग नाबालिग बालिका के साथ दुष्कर्म करने वाले 62 साल के गजाधर पैंकरा को 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा न्यायालय के द्वारा सुनाई गई है। आरोपी के विरूद्ध जशपुर जिले के थाना फरसाबहार में बी.एन.एस. की धारा 64(2)(ट) एवं पाॅक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया था।

लगभग 2 साल पहले 17 सितंबर 2024 को
थाना फरसाबहार में पीड़िता की माता ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसकी 13 वर्षीय दिव्यांग (मूक-बधिर) पुत्री 14 सितम्बर 2024 को घर से बाहर गई थी। इसी दौरान गांव का निवासी गजाधर पैंकरा बालिका को बहला-फुसलाकर सुनसान स्थान पर ले गया और उसकी असहाय स्थिति का फायदा उठाकर उसके साथ दुष्कर्म किया, पीड़िता के घर लौटने पर परिजनों ने उसके व्यवहार में परिवर्तन देखा। पूछताछ एवं सांकेतिक संवाद के माध्यम से घटना की जानकारी मिलने पर तत्काल थाना फरसाबहार में उक्त धारा का रिपोर्ट दर्ज कराई गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना फरसाबहार पुलिस ने तत्काल अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की। पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया, घटनास्थल का निरीक्षण किया गया, आवश्यक वैज्ञानिक एवं दस्तावेजी साक्ष्य संकलित किए गए तथा गवाहों के कथन दर्ज किए गए। विवेचना के दौरान पर्याप्त साक्ष्य प्राप्त होने पर आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजते हुए न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया।

न्यायाधीश (पाॅक्सो), कुनकुरी द्वारा अभियोजन पक्ष के मौखिक, चिकित्सकीय, वैज्ञानिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों का परीक्षण करने के उपरांत आरोपी गजाधर पैंकरा को भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(2)(ट) के अपराध में दोषी ठहराया गया।

न्यायालय ने आरोपी को 20 वर्ष के सश्रम कारावास, ₹1,000 /- अर्थदण्ड तथा अर्थदण्ड अदा न करने पर अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई। साथ ही पीड़िता को शासन की पीड़ित क्षतिपूर्ती योजना के तहत क्षतिपूर्ती प्रदान किए जाने के निर्देश भी जारी किया गया है।

प्रकरण की विवेचना थाना फरसाबहार पुलिस द्वारा गंभीरता एवं संवेदनशीलता के साथ करते हुए सभी आवश्यक साक्ष्य संकलित किए गए तथा समय-सीमा में अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। अभियोजन पक्ष द्वारा प्रभावी न्यायालयीन पैरवी किए जाने के फलस्वरूप अभियुक्त को दोषसिद्धि एवं कठोर दण्ड प्राप्त हुआ। अभियोजन अधिकारियों द्वारा प्रकरण का गहन अध्ययन किया गया, प्रकरण में विशेष लोक अभियोजक द्वारा प्रभावी पैरवी की गई, जिसके परिणामस्वरूप आरोपी को कठोर दंड दिलाया जा सका। प्रकरण की विवेचना उप निरीक्षक सुरजन राम पोर्ते एवं सहायक उप निरीक्षक प्रेमिका खलखो के द्वारा की गई थी।

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