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छत्तीसगढ़ में टिड्डी दल प्रवेश की संभावना को देखते हुए एलर्ट जारी, टिड्डी दल की निगरानी और नियंत्रण के लिये नोडल अधिकारी नियुक्त, फसल या पेड़ों पर टिड्डी दल दिखे तो कृषि, राजस्व विभाग और जिला नियंत्रण कक्ष को करें सूचित

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रायपुर । छत्तीसगढ़ शासन के कृषि विभाग द्वारा टिड्डी दलों के छत्तीसगढ़ राज्य में प्रवेश की प्रबल संभावना को देखते हुए मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र से लगे हुए जिलों के लिए एलर्ट जारी किया गया है। मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले से लगे छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया, सूरजपूर, बलरामपुर आदि जिले में पहुंचने की संभावना को देखते हुए संचालक कृषि द्वारा टिड्डी दल की निगरानी एवं नियंत्रण के लिए राज्य, संभाग और जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष और नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। राज्य में जायद की फसलें, सब्जियां और फल आदि लगी हुई हैं, जिन्हें टिड्डी दल से क्षति की संभावना है। इसे ध्यान में रखकर सभी जिलों के कृषि उप संचालकों को नोडल अधिकारी नियुक्त कर कीट नियंत्रण के उपाय करने के लिए निर्देशत किया गया है।
राज्य में टिड्डी दल के प्रवेश की संभावना को ध्यान में रखते हुए राज्य के कृषकों को सूचित किया गया है कि टिड्डी दल ग्रीष्म कालीन फसलों को भारी मात्रा में नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके साथ ही फलों और सब्जियों की नर्सरियों के लिए भी हानिकारक है। टिड्डी दल दिन के दौरान उड़ता रहता है और शाम 6 से 7 बजे के आसपास पेड़ों पर, झाड़ियों में, फसलों इत्यादि में बसेरा करता है और फिर सुबह 8 से 9 बजे के आसपास पुनः हवा की दिशा में उड़ान भरता है।
टिड्डियों का दल विश्राम के दौरान फसलों को नुकसान पहुंचाता है। इनके विश्राम के समय ही नियंत्रण के उपाय किये जाने चाहिए। इसके नियंत्रण के लिए भारत सरकार के द्वारा विभिन्न कीटनाशकों की अनुशंसा की गई है, जैसे- क्लोरपाईरीफॉस 20 प्रतिशत ई.सी. 1200 मिली., या डेल्टामेथ्रिन 2.8 ई.सी. 500 मिली. या लैम्डासायहेलोथ्रिन 5 प्रतिशत ई.सी. 500 मिली. आदि। इन कीटनाशकों को 500 लीटर पानी में घोल बनाकर सुबह 4 से 9 बजे तक छिड़काव किया जा सकता है। कृषकों से अनुरोध किया गया है कि यदि फसल या पेड़ों पर टिड्डी दल दिखे तो कृषि या राजस्व विभाग के अमले को अथवा जिला नियंत्रण कक्ष को तत्काल सूचित करें। जिला प्रशासन के द्वारा कीट नियंत्रण के पर्याप्त उपाय किए जाएंगे।

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