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मुख्यमंत्री ने स्पीकअप इंडिया कार्यक्रम को फेसबुक लाइव के जरिये किया संबोधित, मुख्यमंत्री ने कहा नेशनल डिजास्टर एक्ट के तहत सारे अधिकार भारत सरकार के पास

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रायपुर । कांग्रेस द्वारा आज देशभर में आयोजित ‘स्पीकअप इंडिया’ कार्यक्रम को फेसबुक लाइव के जरिये संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि कोरोना महामारी पूरे देश में और पूरी दुनिया में फैली हुई है। यह महामारी हमारे देश में हवाई मार्ग से आई। आप सभी को पता है कि यह बीमारी चीन से निकलकर अरबियन और यूरोपियन देशों से होती हुई हिंदुस्तान आई। इस महामारी से पूरी दुनिया में लाखों लोग प्रभावित हुए और हजारों लोगों की जानें चली गईं। जब यह हमारे देश में आई तब पांच लोग ही पीड़ित थे। यदि विदेश से आने वाले यात्रियों को क्वारंटाइन कर दिया होता, उनकी जांच की जाती, होम आइसोलेशन में रख दिया जाता, तो यह पूरे देश में नहीं फैलती। अचानक लॉकडाउन कर दिया गया। पूरा देश जहां था, वहीं थम गया। अनेक देश अपने-अपने तरीके से कोरोना वायरस से लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने अपनी-अपनी समाजिक, आर्थिक, भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लिया। हमारे देश में भी हालात अलग हैं, लेकिन विकसित राष्ट्रों का अंधानुकरण करते हुए प्रधानमंत्री जी ने यहां लॉकडाउन लागू कर दिया। यहां करोड़ों-करोड़ लोग रोजी-रोटी की तलाश में अपने प्रदेश से दूसरे प्रदेश जाते रहे हैं। लॉकडाउन लागू होने से वे वहीं के वहीं फंस गए। कोई तैयारी नहीं थी। उन मजदूरों-किसानों का क्या होगा, वहां के उद्योग-धंधों का क्या होगा, इस बारे में बिना सोचे समझे इस लॉकडाउन को लागू कर दिया गया। पहले एक-दो हफ्ते सभी ने इसे स्वीकार किया, क्योंकि यह भारत सरकार का आदेश था, लेकिन तीसरे लॉकडाउन के बाद लोगों के सब्र का बांध टूट गया। लोगों के पास खाने को नहीं था, खर्च के लिए पैसे नहीं थे,रोजगार छिन चुका था, उन्हें अपने घर की याद सताने लगी। ऐसे में लाखों लोग सड़कों पर आ गए। उन्हें घर तक पहुंचाने की कोई व्यवस्था नहीं की गई। नेशनल डिजास्टर एक्ट के तहत सारे अधिकार भारत सरकार ने अपने पास रख लिए। कहां कंटेनमेंट जोन होगा, कहां रेड, कहां आरेंज, कहां ग्रीन जोन होगा, कौन सी दुकानें खुलेंगी, कौन सी नहीं खुलेंगी, ये सारे फैसले दिल्ली से होने लगे। इस कारण पूरे देश में एक भय और असुरक्षा का वातावरण बना। लोग भयभीत हो गए। अपनी जान जोखिम में डालकर वे सड़कों पर आ गए। अपने परिवार के साथ सैकड़ों किलोमीटर चलने लगे। भूख, गर्मी, पांव के छालों से लोग पीड़ित होते रहे। अनेक लोगों की जानें चली गईं। बाद में जो ट्रेनें चलाईं, वे अपने गंतव्य पर न पहुंचकर दूसरे प्रदेश पहुंच गईं। ऐसी एक-दो घटनाएं नहीं हुईं, 40-40 ट्रेनें मार्ग से भटक गईं। ये स्थिति पूरे देश में बनी।
इस कोरोना संकट में छत्तीसगढ़ सरकार ने अपने स्तर पर जो फैसले लिए, उससे यहां किसी को अनाज की कमी नहीं होने दी, सब्जी की कमी नहीं होने दी। मुझे बताते हुए संतोष हो रहा है कि 56 लाख परिवारों को एक क्विंटल पांच किलो चावल मुफ्त में दिया गया, दाल दिया गया, नमक दिया गया। जिसके पास राशन कार्ड नहीं थे, उन्हें प्रति व्यक्ति पांच किलो चावल दिया गया। हमारे प्रदेश के सामाजिक संगठनों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्हें जहां आवश्यकता थी वहां गर्म भोजन दिया गया, सूखा अनाज दिया गया। राजनैतिक दल के लोगों ने, विधायकों ने, जनप्रतिनिधियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। जितने भी जनप्रतिनिधि हैं, चाहे वे नगरीय निकाय के हों, चाहे पंचायती राज के हों, सभी ने सेवा-भाव से बहुत ही साहसिक काम किया है। हमारे अधिकारी-कर्मचारी दिन रात लगे रहे। किसी को कोई कमी नहीं आने दी।
वहीं राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत 5750 करोड़ रुपए किसानों के खाते में डालने का निर्णय लिया गया। जिसकी प्रथम किश्त 21 मई को राजीव जी की पुण्य तिथि, उनके शहादत दिवस के दिन किसानों के खातों में ट्रांसफर की गई। कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया जी और राहुल जी की उपस्थिति में यह कार्य संपन्न हुआ। अब सभी किसानों के खातों में प्रथम किश्त का पैसा पहुंच गया है। वहीं छत्तीसगढ़ के 43 प्रतिशत भूभाग के जंगलों में रहने वाले अनुसूचित जाति-जनजाति के लोगों तथा परंपरागत निवासियों को लघु वनोपज का वाजिब मूल्य दिलाया गया। जो समर्थन मूल्य भारत सरकार ने घोषित किया था, उससे भी अधिक की राशि में यहां महुआ और ईमली की खरीदी की गई। तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य चल रहा है। लघु वनोपज के माध्यम से हमारे वनांचल में रहने वाले भाई-बहनों की जेब में 2500 करोड़ रुपए पहुंचाने की हमने व्यवस्था की है। छत्तीसगढ़ में लगभग 26 लाख मजदूर मनरेगा में कार्यरत हैं। इस बीच जो अफरा-तफरी मची, उस दौरान छत्तीसगढ़ आने के इच्छुक प्रवासियों की कठिनाइयों को दूर करने के लिए ट्रेनों और वाहनों की व्यवस्था हमने की। ऐसे लगभग दो लाख लोगों को अब तक छत्तीसगढ़ लाया जा चुका है। उनके रहने-खाने की व्यवस्था की गई। 14,499 क्वारंटाइन सेंटर बनाए गए हैं। हमारी पंचायतें, सरपंच, सचिव, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सामाजिक संगठन, शासकीय कर्मचारी दिन-रात मेहनत करके उनके भोजन आदि की व्यवस्था कर रहे हैं। जिनके पास राशन कार्ड नहीं हैं, उनका राशन कार्ड बनाया जा रहा है। जिनके पास जॉब कार्ड नहीं है, उनका जॉब कार्ड बनाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के लोगों के सेवा भाव की जितनी प्रशंसा की जाए, वह कम है।
मैं बताना चाहूंगा कि भौगोलिक दृष्टि से हमारा राज्य 7 राज्यों से घिरा है। गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, झारखंड, ओडिशा, मध्यप्रदेश की ओर से आने-जाने वाले 10 से 15 हजार मजदूर रोज यहां से गुजरते रहे। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा इन मजदूरों के लिए बसों की व्यवस्था की गई। इनके जरिये उन्हें छत्तीसगढ़ की एक सीमा से दूसरी सीमा तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई। जिन प्रवासी मजदूरों के चप्पल-जूते टूट गए थे, उन्हें चप्पल-जूते उपलब्ध कराए गए। पूरे देश में अकेला छत्तीसगढ़ राज्य है जिसने मजदूरों के लिए चप्पल-जूतों की व्यवस्था की। मैंने अब निर्देश दिया है कि जो भी श्रमिक ट्रेनें छत्तीसगढ़ से गुजर कर अन्य प्रदेशों में जा रही हैं, हमारे स्टेशनों में उनके लिए भी चाय और बिस्किट की व्यवस्था की जाए। ताकि यात्रियों को असुविधा न हो।
अभी उद्योग-व्यापार ठप पड़ गए हैं। करोड़ों-करोड़ लोगों के सामने रोजगार की समस्या उत्पन्न हो गई है। ऐसे में हमारे नेता राहुल गांधी जी ने भारत सरकार से मांग की है कि तत्काल 10 हजार रुपए हर व्यक्ति के खाते में डाले जाएं और छः महीने तक साढ़े 7 हजार रुपए दिए जाएं, ताकि इस करोना संकट काल में हर व्यक्ति आर्थिक रूप से खुद को सुरक्षित महसूस कर सके। यह बहुत आवश्यक है, क्योंकि घर लौटने के बाद उनके सामने रोजगार की समस्या है और उससे वह चिंतित है। इस चिंता सेमुक्त करने के लिए यह बहुत आवश्यक है। भारत सरकार यदि यह निर्णय लेती है तो करोड़ों-करोड़ श्रमिकों, छोटे दुकानदारों, किसानों के लिए बहुत बड़ा संबल होगा।

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