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छत्तीसगढ़ : ब्लास्टिंग बंद नहीं हुई तो खदान में आकर महिलाएं धरना देने के लिए होंगे मजबूर

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कोरबा । एसईसीएल कुसमुंडा खदान से प्रभावित ग्राम पड़निया के ग्रामीणों ने खदान में घुसकर कामबंद आंदोलन कर दिया था। इसके बाद प्रबंधन के अफसरों ने 26 फरवरी को गांव में वार्ता का आश्वासन दिया था। आश्वासन अनुरूप गांव की समस्याओं का समाधान करने बैठक हुई। बैठक में ग्रामीणों की ब्लास्टिंग सहित अन्य समस्याओं पर चर्चा सकारात्मक रही। अधिकारियों ने उन्हें समस्याओं के निराकरण का आश्वासन दिया, तो दूसरी ओर भू-अर्जन दर पर सहमति नहीं बन पाई। एसईसीएल कुसमुंडा खदान में कोयला खनन के दौरान हैवी ब्लास्टिंग से गांव में गुजर-बसर मुश्किल होना बताकर पड़निया की 35 से 40 महिलाओं ने बुधवार की सुबह 9 बजे माइंस के भीतर धरने पर बैठ गए थे। कोल परिवहन में लगे भारी वाहनों को रोक दिया। एसईसीएल अफसरों की समझाइश पर गांव की महिलाओं ने कहा कि हैवी ब्लास्टिंग बंद नहीं हुई तो खदान में आकर रोज धरना देने के लिए मजबूर होंगे। धरने पर बैठी खदान प्रभावित गांव पड़निया की महिलाओं को समझाइश देने एसईसीएल के अफसर मौके पर पहुंचे। मगर उनकी मांगे पूरी करने ठोस आश्वासन नहीं मिलने तक धरना खत्म नहीं करने पर आंदोलनकारी अड़ गए। करीब 5 घंटे तक महिलाएं धरने पर बैठी रहीं। 26 फरवरी को एसईसीएल कुसमुंडा प्रबंधन के साथ पड़निया के भू.विस्थापितों के साथ बैठक आयोजित कर मांगों पर अफसरों के चर्चा कर निर्णय लेने का आश्वासन देने पर धरना समाप्त हुआ था। इसके तहत रविवार को गांव में बैठक आयोजित हुई। ग्रामीणों की समस्याओं पर जीएम संजय मिश्रा की मौजूदगी में चर्चा हुई। समस्याओं को दूर करने का आश्वासन दिया गया। ग्रामीणों ने बैठक में मांग रखी कि उन्हें अर्जित भूमि के एवज में मुआवजा वर्तमान दर पर दिया जाए तो प्रबंधन की ओर से वर्ष 2009-10 के अनुसार मुआवजा देने के नियमों के बारे में अवगत कराया गया। इस मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई।

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