Home छत्तीसगढ़ यूनीफार्म मिलना था मुफ्त में, प्रबंधन बोला- खरीद लो

यूनीफार्म मिलना था मुफ्त में, प्रबंधन बोला- खरीद लो

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रायपुर । प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले छात्रों को 31 जुलाई तक स्कूल ड्रेस और पुस्तक वितरण करने का निर्देश स्कूल शिक्षा संचालक ने जारी किया था. 12 जून को जारी इस निर्देश का पालन शत-प्रतिशत पूरा नहीं हो पाया है। जिले के आत्मानंद स्कूलों में पढऩे वाले छात्र स्कूल ड्रेस और किताबे खरीदने के लिए मजबूर हैं. इन स्कूलों में पढऩे वाले छात्रों के पालकों का कहना है, कि बच्चों को प्रवेश इसलिए दिलवाया था, ताकि उनकी पढ़ाई में पैसा ना खर्च करना पड़े. लेकिन छात्रों की पुस्तकें और ड्रेस अभी भी बाहर से खरीदकर देना पड़ रहा है.
योजनाओं का लाभ नहीं मिलने से दुख
इंद्रप्रस्थ निवासी पालक ने बताया, कि उन्होंने अपने बच्चे का स्कूल आत्मानंद अंग्रेजी मीडियम स्कूल में करवाया था. स्कूल से ड्रेस नहीं मिली, पुस्तकें-कॉपी भी नाम मात्र की मिली, तो उन्हें बाहर से खरीदना पड़ा।
हजार से ज्यादा छात्र योजना के तहत मिलता है ये स्कूल ड्रेस, पुस्तक, कॉपियां, छात्रवृत्ति, पात्र छात्राओं को साइकिल कुछ स्कूलों में पिछले साल से नहीं मिली ड्रेस आत्मानंद अंग्रेजी मीडियम स्कूलों में ड्रेस वितरित हुई है या नहीं बात का खुलासा हुआ, कि कुछ स्कूलों में पिछले साल से ड्रेस का वितरण नहीं हुआ है. स्कूल प्रबंधन विभागीय अधिकारियों को इसकी सूचना दे चुका है.
योजना के तहत छात्राओं को साइकिल बांटी गई है. यूनीफार्म नहीं मिला है. इसलिए उसका वितरण नहीं हो पाया है.
मुकेश सिरमौर, प्राचार्य, आडवानी स्कूल
स्कूल ड्रेस विभाग से नहीं मिली है. अभी छात्रों को वितरित नहीं किया गया है. योजना के तहत मिलने वाली पुस्तकें-सायकिल छात्रों को दे दी गई है. – मंजू अग्रवाल, प्राचार्य, बिन्नी बाई सोनकर स्कूल
स्कूल प्रबंधन बोल रहा, जब मिलेगी तब वितरित करेंगे
आत्मानंद स्कूलों में पढऩे वाले बच्चो के पालकों ने बताया कि उन्होंने स्कूल प्रबंधन से स्कूल ड्रेस की मांग की थी. जिस पर स्कूल प्रबंधन ने बताया है कि उनके पास ड्रेस नहीं आई है. जैसे ही यूनीफार्म आएगा, वितरण किया जाएगा. स्कूल प्रबंधन ने पालकों को एक जोड़ी ड्रेस खरीदने की सलाह दी है. ताकि बच्चे यूनीफार्म में स्कूल आ सकें.
आत्मानंद स्कूलों के छात्रों का स्कूल ड्रेस अभी सिलकर नहीं आ पाया है. स्कूल ड्रेस आते ही उनका वितरण शुरू कराया जाएगा.
केएस पटले, नोडल, स्कूल शिक्षा

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