जशपुर। एक्ट्रोसिटी एक्ट जैसे गंभीर मामले में पुलिस की आरोपीयो के साथ मिली भगत का एक मामला प्रकाश में आया है। पीड़ित आदिवासी व्यक्ति का आरोप है कि उसे ठग कर अजाक थाना बुला लिया गया और जबरन न्यायालय भेज कर उसकी कोर्ट में गवाही करा दी गई जिसकी वजह से उसको न्याय नहीं मिल पाया।
जशपुर जिले के थाना तपकरा में सुंडरू ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम पोकपानी के रहने वाले अनुरंजन मिंज के लिखित आवेदन पर तपकरा थाना में तीन आरोपियों क्रमशः रविनारायण यादव, मोहन यादव और शिवकुमार यादव के खिलाफ 13 जुलाई 2026 को एक्ट्रोसिटी एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध है।
पीड़ित अनुरंजन मिंज और उसके भाई संदीप मिंज ने बताया कि उनके द्वारा 13 जुलाई 2026 को सुंडरू ग्राम पंचायत के रहने वाले रविनारायण यादव, शिव कुमार यादव और मोहन यादव के खिलाफ लिखित शिकायत आवेदन दिया गया था जिसके बाद उक्त तीनों आरोपियों के खिलाफ उसी दिन तपकरा थाना में एक्ट्रोसिटी एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है । संदीप मिंज ने बताया कि उक्त तीनों आरोपियों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध होने के बाद तपकरा पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार नहीं की, तीनों आरोपी एक माह तक खुलेआम घूमते रहे । संदीप मिंज ने बताया कि 11 अगस्त 2026 को अजाक थाना प्रभारी ने रात में फोन कर बताया कि आपको और आपके भाई पीड़ित अनुरंजन मिंज को उप पुलिस अधीक्षक अजाक, कल 12 अगस्त को सवेरे बुलाए हैं। संदीप मिंज ने बताया कि उक्त सूचना पाकर वे अपने भाई पीड़ित अनुरंजन मिंज के साथ जशपुर अजाक थाना 12 अगस्त के दोपहर के लगभग 12:00 बजे पहुंचे। संदीप मिंज ने बताया कि जब वे जशपुर अजाक थाना पहुंचे उस वक्त इस मामले के तीनों आरोपी रविनारायण यादव, शिवकुमार यादव और मोहन यादव अजाक थाना के बाहर टहल रहे थे। उसने बताया कि अजाक थाना पहुंचने के बाद अजाक थाना के प्रभारी के द्वारा एक नोटिस उन्हें दिया गया जिसमें यह लिखा गया था कि आपको अविलंब जाति प्रमाण पत्र जमा करना है। उसने बताया कि उनके द्वारा पहले ही जाति प्रमाण पत्र और जरूरी दस्तावेज अजाक थाना प्रभारी को दे दिया गया था इसके बावजूद भी अजाक प्रभारी ने ठग कर बुला लिया। संदीप मिंज ने बताया कि उनके द्वारा अजाक थाना प्रभारी को दोबारा जाति प्रमाण पत्र ,आधार कार्ड और जरूरी दस्तावेज देने के बाद अजाक थाना से जाने की अनुमति ली परंतु अजाक थाना प्रभारी ने अनुरंजन मिंज और संदीप मिंज को रोक लिया , उन्होंने कहा कि अभी आपको न्यायालय भी जाना है।

इसके बाद पीड़ित अनुरंजन मिंज को शासकीय वाहन में बैठाकर जशपुर न्यायालय ले जाया गया। सेकंड टाइम अपरान्ह 3:00 बजे के आसपास पुलिस ने तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया और पीड़ित अनुरंजन मिंज की कोर्ट में गवाही भी करा दी गई। पीड़ित के भाई संदीप मिंज ने बताया कि न्यायालय पहुंचने के बाद उसके भाई अनरंजन मिंज को पुलिस वालों के द्वारा न्यायालय का एक पत्र दिया गया जो की तपकरा थाना प्रभारी के नाम पर था। उसने बताया कि न्यायालय से मिले पत्र में उनके भाई अनुरंजन मिंज को 13 अगस्त 2026 को न्यायालय में उपस्थित होने का उल्लेख किया गया था लेकिन पुलिस के द्वारा 13 अगस्त को ओवरराइटिंग कर 12 अगस्त बनाया गया था और उसे जबरन कोर्ट में गवाही करा दी गई। कोर्ट में गवाही देने के बाद अजाक थाना प्रभारी के द्वारा संदीप मिंज और उसके भाई अनुरंजन मिंज को कोर्ट से भेज दिया गया।

आपको बता दें एक्ट्रोसिटी एक्ट जैसे गंभीर मामले में न्यायालय के द्वारा पीड़ित को सुनने का नियम है। इसी नियम के तहत उक्त मामले में आरोपियों को पेश करने के दूसरे दिन पीड़ित को सुना जाता है। पीड़ित को सुनने से पहले न्यायालय के द्वारा संबंधित थाना को एक नोटिस भेज कर पीड़ित को न्यायालय में उपस्थित कराया जाता है लेकिन अनुरंजन मिंज के मामले में आरोपी और पीड़ित व्यक्ति को एक ही दिन न्यायालय पेश कर दिया गया जबकि इस मामले में कोर्ट के द्वारा अनुरंजन मिंज को 13 अगस्त 2026 को कोर्ट में उपस्थित होने के लिए कहा गया था लेकिन पुलिस के द्वारा 12 अगस्त 2026 को कोर्ट से मिले नोटिस को पीड़ित को देकर 13 अगस्त को 12 अगस्त बनाकर उसी दिन पीड़ित की कोर्ट में गवाही करा दी गई जो की एक गंभीर मामला है ।
पीड़ित के भाई संदीप ने बताया कि पुलिस के द्वारा इस मामले में सही तरीके से विवेचना नहीं किया गया है। घटना दिनांक 10 जुलाई 2026 को आरोपी रविनारायण यादव के द्वारा उसके भाई अनुरंजन मिंज के साथ मछली काटने वाले औजार से प्राण घातक हमला करने का प्रयास किया गया था लेकिन इससे संबंधित पुलिस के द्वारा कोई धारा नहीं लगाया गया। उसने यह भी बताया कि उसके भाई का रविनारायण यादव के द्वारा मोबाइल को छीन लिया गया था लूट लिया गया था और काफी हाथ पांव जोड़ने के बाद मोबाइल को लौटाया गया था परंतु पुलिस के द्वारा इस घटना से संबंधित धारा नहीं लगाया गया है।
ये है पूरा घटनाक्रम :
सुंडरू ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम पोकपानी का रहने वाला अनुरंजन मिंज अपनी पत्नी व 4 साल की मासूम बच्ची के साथ 10 जुलाई दिन शुक्रवार को साप्ताहिक बाजार सुंडरू गया था। इस दौरान बाजार में लगे मछली बेचने वाले के पास गया उसे मछली खरीदना था, इस दौरान रवि नारायण यादव मछली दुकान में मौजूद था जब अनुरंजन मिंज मछली का प्रति किलो रेट पूछा तो दुकान वाले को रेट बताने के बजाय वहां मौजूद रवि नारायण यादव अनुरंजन मिंज को बोलने लगा की मछली ₹400 किलो है। इसके बाद रवि नारायण यादव अनुरंजन मिंज से बद्तमीजी करने के साथ ही मछली काटने वाले लोहे के औजार से उसको मारने का प्रयास करते हुए जातिगत गाली गलौज भी करने लगा यही नहीं रवि नारायण यादव अनुरंजन मिंज के जेब में हाथ डालकर उसके मोबाइल को छीन लिया और पहने हुए निकर चड्ढा को खींच दिया जिससे अनुरंजन मिंज भरे बाजार में निर्वस्त्र हो गया। इस घटना के बाद अनुरंजन मिंज अपनी पत्नी व 4 साल की मासूम बच्ची के साथ अपनी स्कूटी में सवार होकर अपने घर पोकपानी लौटने लगा इस बीच रवि नारायण यादव के दो साथी क्रमशः मोहन यादव एवं शिवकुमार यादव अपनी बाइक से आकर रास्ता रोक कर अनुरंजन मिंज के स्कूटी चाबी को छीन कर उसके साथ अभद्र व्यवहार करने लगे इसी बीच उसी जगह पर रवि नारायण यादव भी पहुंच गया और अनुरंजन मिंज के साथ मारपीट करते हुए जातिगत गाली गलौज देने लगा। इस घटना के बाद अनुरंजन मिंज अपने सरपंच भाई संदीप मिंज को फोन करके बुलाया। इसके बाद सरपंच घटनास्थल पहुंचा और मामले को शांत कराया।
इस घटना के बाद अनुरंजन मिंज काफी भयभीत हो गया था और जिसकी वजह से अपने समाज के लोगों को घटना के बारे में बताया इसके बाद रविवार के दिन सैकड़ो की संख्या में समाज के लोगों के द्वारा साप्ताहिक बाजार सुंडरू में एक बैठक का आयोजन किया गया और यह निर्णय लिया गया कि रवि नारायण यादव और उनके दो साथियों के खिलाफ तपकरा थाने में अपराध पंजीबद्ध कराना है। जिसके बाद 13 जुलाई 2026 दिन सोमवार को पीड़ित अनुरंजन मिंज अपने सरपंच भाई संदीप मिंज और गांव के कुछ महिलाओं के साथ थाना पहुंचकर रवि नारायण यादव और उनके दो अन्य साथी शिवकुमार यादव और मोहन यादव के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (नृशंसता निवारण) अधिनियम, 1989 (संशोधन 2015) की धारा 3(1)(द), 3(1)(ध), 3(2)(va), एवं भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 115(2), 126, 296, 3 (5) के तहत अपराध पंजीबद्ध कराया था।



