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14 वें इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर के दूसरे दिन भी जशपुर के महुआ उत्पाद बने आकर्षण, गुणवत्ता और पैकेजिंग देखकर आगंतुक हुए प्रभावित

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जशपुर। रायपुर के साइंस कॉलेज ग्राउंड में चल रहे 14वें इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में JASHPURE और Jai Jungle का स्टॉल महुआ की एक नई पहचान लोगों के सामने रख रहा है।

18 सितंबर से शुरू हुआ यह आयोजन 20 सितंबर तक चलेगा। मेले के दूसरे दिन शनिवार को भी बड़ी संख्या में आगंतुकों ने जशपुर के उत्पादों को देखा और महुआ से तैयार किए जा रहे नए खाद्य उत्पादों के बारे में जानकारी ली।

जिस महुआ को लंबे समय तक मुख्यतः पारंपरिक उपयोग और शराब से जोड़कर देखा जाता रहा, उसी महुआ को जशपुर में अब खाद्य नवाचार, पोषण, अनुसंधान और जनजातीय आजीविका की नई संभावनाओं से जोड़ा जा रहा है।

हॉल नंबर 3 के स्टॉल नंबर 4 एवं 5 पर महुआ नेक्टर, महुआ नेक्टर गोल्ड, वन्यप्राश, महुआ एनर्जी पाचक, महुआ टी, महुआ आधारित कुकीज़, रागी-महुआ उत्पाद, महुआ लड्डू और फूड-ग्रेड महुआ फूल सहित कई उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। महुआ से बने उत्पादों की विविधता के साथ उनकी गुणवत्ता, पैकेजिंग और आधुनिक प्रस्तुति भी लोगों का ध्यान खींच रही है।

कई आगंतुकों के लिए यह आश्चर्य का विषय रहा कि राष्ट्रीय स्तर के ब्रांडों जैसी फिनिश और पैकेजिंग वाले ये उत्पाद जशपुर जैसे वन एवं जनजातीय बहुल जिले में विकसित और तैयार किए जा रहे हैं। कई लोगों ने पहली बार महुआ को पारंपरिक उपयोग से अलग इतने विविध खाद्य स्वरूपों में देखा और उत्पादों को चखने के बाद उनके स्वाद और प्रस्तुति की भी सराहना की।

यह अनुभव जशपुर में पिछले कुछ वर्षों से विकसित हो रहे एक व्यापक मॉडल को भी सामने रखता है। जब
जिला प्रशासन, स्थानीय समुदाय, महिला समूह, उत्पादक संस्था और तकनीकी संस्थान एक साझा दिशा में काम करते हैं, तो स्थानीय संसाधनों से भी बेहतरीन गुणवत्ता और बाजार के अनुरूप उत्पाद विकसित किए जा सकते हैं।

JASHPURE के माध्यम से जिले में इसी सोच के साथ स्थानीय वन उपज और पारंपरिक उत्पादों के मूल्य संवर्धन पर काम किया जा रहा है।

महुआ के इस बदलाव के पीछे Jai Jungle लगातार अनुसंधान और उत्पाद विकास का काम कर रही है। जिला प्रशासन जशपुर के सहयोग से संचालित Mahua Centre of Excellence और ‘Mahua Kosh’ में महुआ के खाद्य उपयोग, नए उत्पादों, फूड-ग्रेड कलेक्शन, डिहाइड्रेशन, प्रसंस्करण तकनीक और गुणवत्ता सुधार पर व्यापक स्तर पर प्रयोग किए जा रहे हैं।
इस प्रयास में महुआ को केवल तैयार उत्पाद के रूप में नहीं, बल्कि पेड़ से बाजार तक पूरी वैल्यू चेन के रूप में देखा जा रहा है—स्वच्छ संग्रहण और फूड-ग्रेड महुआ तैयार करने से लेकर प्रोसेसिंग, रिसर्च, पैकेजिंग और मार्केटिंग तक। इससे महुआ का मूल्य बढ़ाने के साथ इससे जुड़े जनजातीय परिवारों और महिलाओं के लिए बेहतर आजीविका की संभावनाएं विकसित करने पर भी काम हो रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य में स्थानीय एवं जनजातीय उत्पादों के मूल्य संवर्धन और उन्हें व्यापक बाजार से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। जशपुर में महुआ को लेकर किया जा रहा यह कार्य उसी दिशा में महुआ की पुरानी और सीमित पहचान को बदलते हुए इसके खाद्य एवं पोषण संबंधी पहलुओं को सामने लाने का प्रयास है।

मेले में JASHPURE एवं Jai Jungle के स्टॉल का प्रतिनिधित्व जशपुर की अनेश्वरी भगत और गणपति बाई कर रही हैं। वे आगंतुकों को उत्पादों के साथ यह भी बता रही हैं कि महुआ का संग्रहण किस तरह किया जाता है, उसे फूड-ग्रेड बनाने के लिए क्या बदलाव किए गए हैं और किस तरह पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक फूड प्रोसेसिंग से जोड़ा जा रहा है।

यह हमारे लिए महत्वपूर्ण संकेत है, लेकिन इसे वैज्ञानिक रूप से समझना जरूरी है। हमारा अगला लक्ष्य महुआ में आयरन की मात्रा के साथ उसकी शरीर में उपलब्धता और उपयोगिता का व्यवस्थित अध्ययन करना है।”

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