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थाना पत्थलगांव बना राष्ट्रीय लोक अदालत , इस थाने में अब आदिवासी महिला के साथ हुए गंभीर अपराध के मामले को सुलझाया जा रहा राजीनामा से, लिखित आवेदन देने व बयान देने के 7 दिन बाद भी आरोपियों के खिलाफ नहीं हुआ अपराध पंजीबद्ध, देखिए लिखित आवेदन, लिखित बयान व राजीनामा की कॉपी

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जशपुर। जशपुर जिले का पत्थलगांव थाना अब राष्ट्रीय लोक अदालत बन चुका है। जहां पर कुछ पुलिस वाले जज की भूमिका निभा रहे हैं। जशपुर जिले के तपकरा तहसील व थाना तपकरा अंतर्गत ग्राम सुंडरू की रहने वाली 49 साल की आदिवासी महिला निर्मला मिंज ने 2 अक्टूबर 2026 को अपने पति व रिश्ते की भांजी के साथ पत्थलगांव थाना पहुंचकर एसडीओपी धुर्वेश जायसवाल को एक लिखित आवेदन दी थी। उक्त लिखित आवेदन में आदिवासी महिला निर्मला मिंज ने पत्थलगांव एसबीआई लाइफ शाखा में कार्यरत नरेंद्र बेहरा व उसके अन्य तीन साथियों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे। जिसके बाद एसडीओपी पत्थलगांव धुर्वेश जायसवाल के निर्देश पर पत्थलगांव थाना में पदस्थ सब इंस्पेक्टर भागवत नायकर के द्वारा आदिवासी महिला निर्मला मिंज का बयान उसकी भांजी की उपस्थिति में लिया गया। निर्मला मिंज व उसकी भांजी के मुताबिक उसका बयान लेने के दौरान सब इंस्पेक्टर भागवत नायकर के द्वारा उनसे बद्तमीजी भी की गई। उनसे बोला गया कि जब नरेंद्र बेहरा और दयाराम यादव आपके सारे पैसे लौटा चुके हैं तो उसके खिलाफ में कार्यवाही के लिए आप क्यों पीछे पड़े हुए हो और मन मुताबिक महिला का बयान लिया गया उसकी बात को नहीं सुना गया।

पत्थलगांव थाने में आवेदन देने के ठीक 6 दिन बाद 8 अक्टूबर 2026 को प्रात लगभग 7:30 बजे पत्थलगांव एसबीआई लाइफ शाखा में पदस्थ दयाराम यादव और नरेंद्र बेहरा आदिवासी महिला निर्मला मिंज के घर पहुंचकर दबाव बनाकर एक राजीनामा आवेदन पत्थलगांव थाना प्रभारी के नाम लिखवाया गया है।

इस गंभीर मामले में कया एक्शन लेना था थाना पत्थलगांव को?

थाना पत्थलगांव पुलिस को इस आवेदन पर तुरंत प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करनी चाहिए थी, क्योंकि आवेदन में गैर-जमानती और संज्ञेय अपराधों (Cognizable Offences) का स्पष्ट उल्लेख है। चूंकि पीड़िता एक आदिवासी महिला है और घटना घर में जबरन घुसकर जान से मारने की धमकी देने से जुड़ी है, इसलिए पुलिस को त्वरित कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए थी।

आरोपी नरेंद्र बेहरा

पुलिस द्वारा की जाने वाली आवश्यक कार्रवाई

1 – FIR पंजीकरण : भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 के तहत तुरंत एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए थी।

2 – पीड़िता और गवाहों के बयान : पीड़िता (श्रीमती निर्मला मिंज) और उनके पति (श्री विजय मिंज) के विस्तृत बयान दर्ज किए जाने चाहिए थे लेकिन पत्थलगांव पुलिस ने केवल पीड़िता निर्मला मिंज का ही बयान लिया है।

3 – घटनास्थल का निरीक्षण : पुलिस को ग्राम सुंडरू स्थित पीड़िता के घर जाकर मौका मुआयना करना चाहिए और साक्ष्य जुटाने चाहिए।

4 – आरोपियों की पहचान व गिरफ्तारी : मुख्य आरोपी नरेन्द्र बेहरा की गिरफ्तारी और सीसीटीवी फुटेज या हुलिए के आधार पर स्कॉर्पियो वाहन सहित अन्य तीन अज्ञात साथियों की पहचान कर कार्रवाई की जानी थी।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 के तहत बनने वाली धाराएं –
आवेदन में वर्णित घटना के आधार पर मुख्य रूप से निम्नलिखित धाराओं के तहत मामला बनता है :
• धारा 329(1) गृह-अतिचार – यह धारा तब लागू होती है जब कोई व्यक्ति किसी के घर में अपराध करने, डराने या अपमानित करने के इरादे से जबरन प्रवेश करता है। आरोपियों द्वारा जबरन घर में घुसने के कारण यह धारा बनती है। आरोपियों के द्वारा 1 अक्टूबर को आदिवासी महिला निर्मला मिंज  के घर रात्रि के लगभग 8:00 बजे प्रवेश किया गया था। किसी के घर में बिना अनुमति के प्रवेश करना वह भी रात्रि के समय , भारतीय न्याय संहिता 2023 में इसकी  गंभीरता का उल्लेख किया गया है।

धारा 331 (रात्रिकालीन गृह-भेदन ) :  चूंकि घटना रात के 8:00 बजे की है (जो कि कानूनन सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले का समय है), इसलिए आरोपियों पर रात में घर में अवैध रूप से घुसने के लिए धारा 331 लागू होगी। यदि आरोपी हमला करने या डराने की तैयारी के साथ घुसे हैं, तो इसके तहत गंभीर सजा का प्रावधान भी है।

• धारा 351(2) या 351(3) आपराधिक धमकी : जब किसी व्यक्ति या उसके परिवार को जान से मारने या गंभीर चोट पहुँचाने की धमकी दी जाती है। आवेदन के अनुसार, आरोपियों ने पति-पत्नी को जान से मारने की धमकी दी है, जो इस धारा के अंतर्गत दंडनीय है।

• धारा 3(5) [संयुक्त संलिप्तता : चूंकि घटना को नरेन्द्र बेहरा ने अपने तीन अन्य साथियों के साथ मिलकर (समान मंशा से) अंजाम दिया है, इसलिए सामूहिक रूप से अपराध करने के लिए संयुक्त दायित्व की धारा भी जोड़ी जाएगी।

विशेष अधिनियम के तहत कार्रवाई :
चूंकि आवेदिका ने स्वयं को अनुसूचित जनजाति (ST – आदिवासी महिला) बताया है और उनके साथ दुर्व्यवहार व धमकी की घटना हुई है, इसलिए BNS की धाराओं के साथ-साथ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (SC/ST Act) की सुसंगत धाराओं (जैसे घर में घुसकर अपमानित करना या डराना) के तहत भी मामला दर्ज किया जाना अनिवार्य है।

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