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बगीचा एसडीएम ने कहा मैने किसी भी अधिवक्ता के साथ नहीं किया अभद्र व्यवहार, फर्जी वन अधिकार पत्र की जांच कराकर वास्तविक कब्जेदार को वन भूमि का कब्जा दिलाने एसडीएम बगीचा को ग्रामीणो ने की लिखीत शिकायत

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जशपुर। पिछले कुछ दिनो से शोसल मीडिया मे बगीचा एसडीएम रोहित व्यास के संबंध मे यह देखने सुनने को मिल रहा है कि उन्होंने बगीचा क्षेत्र के एक वरिष्ठ अधिवक्ता जोसेफ लकड़ा को अपने कोर्ट मे बुलाकर सभी के सामने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया है। इस संबंध मे बगीचा एसडीएम रोहित व्यास ने बताया कि वे किसी भी अधिवक्ता के साथ अभद्र व्यवहार नहीं कर सकते। कुछ दिन पहले वे अपने कोर्ट मे वरिष्ठ अधिवक्ता जोसेफ लकड़ा को जरूर बुलाये थे लेकिन वे उसके साथ अभद्र व्यवहार नहीं किये हैं। उन्होंने बताया कि नगर पंचायत बगीचा मे जल आवर्धन योजना के तहत पाईप लाईन बिछाने का कार्य चल रहा है। कुछ दिन पहले जब नगर पंचायत बगीचा मे पाईप लाईन बिछाया जा रहा था इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता जोसेफ लकड़ा के पुत्र ज्वाकिम लकड़ा व रायकेरा पंचायत की सरपंच के द्वारा रायकेरा पंचायत के आश्रित ग्राम रूपसेरा के पास बिछाये जा रहे पाईप लाईन का विरोध करने लगे। सूत्रो से मिली जानकारी मुताबिक वरिष्ठ अधिवक्ता जोसेफ लकड़ा के पुत्र ज्वाकिम लकड़ा के द्वारा पाईप लाईन को उखाड़ते हुए शासकीय कार्य मे बाधा डाला गया। इस बात की जानकारी जब एसडीएम बगीचा रोहित व्यास को हुई तो वे फौरन नायब तहसीलदार रोशनी तिर्की को घटना स्थल पर जाने के निर्देश दिये। जब नायब तहसीलदार रोशनी तिर्की मौके पर पहुंची उस दौरान वहां का माहौल कुछ ठीक नहीं था। नायब तहसीलदार रोशनी तिर्की ने देखा कि वहां पर बिछाये गये पाईप लाईन को तहस-नहस कर दिया गया है। बगीचा एसडीएम रोहित व्यास ने बताया कि इस घटना के बाद ज्वाकिम लकड़ा को एसडीएम कोर्ट से सम्मन जारी किया गया था। बताया जाता है कार्यवाही के डर से ज्वाकिम लकड़ा रायकेरा सरपंच को नायब तहसीलदार संजय राठौर के खिलाफ एट्रोसीटी एक्ट के तहत शिकायत करने के लिये बगीचा थाने भेजा था जबकि मौके पर जांच के लिये नायब तहसीलदार रोशनी तिर्की गई थी।


इसी बीच 11 सितम्बर को रूपसेरा के ग्रामीणो ने बगीचा एसडीएम को एक लिखित शिकायत आवेदन देते हुए दो एकड़ वन भूमि को वास्तविक कब्जेदार को दिलाये जाने की गुहार लगाई है। ग्रामीणो का आरोप है कि ज्वाकिम लकड़ा फर्जी तरिके से खसरा नम्बर 30/1 रकबा दो एकड़ का वन अधिकार पत्र बनवा लिया है जबकि ज्वाकिम के पिता जोसेफ लकड़ा मूलतः सरगुजा जिले के रहने वाले हैं। वे वर्ष 1986 मे बगीचा आये थे और अपने पूरे परिवार को वर्ष 2005 मे बगीचा लेकर आये। जब वे 1986 मे बगीचा आये थे तब वे नथानियल के यहां किराये का मकान लेकर रहते थे। आपको बता दे वन अधिकर पत्र के लिये तीन पीढीयो का कब्जा होना चाहिये। ग्रामीणो के द्वारा एसडीएम बगीचा को दिये गये आवेदन के मुताबिक खसरा नम्बर 30/1 रकबा दो एकड़ पर नथानियल पिता पौलूस, ललित तिर्की व गाब्रिएल पिता तिरंगा का वर्ष 1970 से कब्जा है। इस कारण ग्रामीणो ने वन अधिकार पत्र की जांच कराकर वास्तविक कब्जेदार को वन भूमि का वन अधिकार पत्र दिलाये जाने की मांग की है।


ग्रामीणो के द्वारा एसडीएम बगीचा को आवेदन देने के बाद एसडीएम रोहीत व्यास खसरा नम्बर 30/1 मौके पर राजस्व अधिकारियो के साथ गये थे। एसडीएम ने बताया कि ग्रामीणो से आवेदन मिलने के बाद वे स्वयं जांच के लिये पहुंचे थे। ज्वाकीम को खसरा नम्बर 30/1 रकबा दो एकड़ का वन अधिकार पत्र दिखाने के लिये कहा गया लेकिन वे वहां उपस्थित सभी अधिकारीयो का अपने मोबाईल से फोटो खींचकर वहां से चला गया। एसडीएम ने बताया कि खसरा नम्बर 30/1 रकबा दो एकड़ वन अधिकार पत्र की जांच कराई जा रही है। जांच के बाद ही
यह सपष्ट हो पायेगा कि वन अधिकार पत्र फर्जी है या सही है। एसडीएम ने यह भी बताया कि वन भूमि मे ज्वाकिम लकड़ा के द्वारा कुछ निर्माण कार्य भी कराया गया है। आपको बता दे जब किसी को वन अधिकार पत्र दिया जाता है तो वह व्यक्ति उसके वास्तविक स्वरूप को नहीं बदल सकता। उसका उपभोग कर सकता है। पेड़ नहीं काट सकता।

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